परिश्रम ही फलदायी है
ये कदम नही प्रहार है,
हर दर्द पर आघात है,
जो चोट मैने खायी थी,
जो दर्द मैने झेला है,
उस दर्द ने ली अब अंगराई है,
उस दर्द की घटी परछाई है,
अभाव प्रभाव के रूप मे ऊभर आयी है,
जिसने बेर्ददी का अंघेरा का दूर भगायी है,
इस संघर्ष से नया सबेरा आयी है,
मदमस्त पवन लहराई है,
खुशीयो की बादल छायी है,
मुस्कुराहट की बूँदे छलकायी है,
अंकूर फुट बाहर आयी है,
धरती पर हरियाली लहलहायी है,
क्योकि परिश्रम ही फलदायी है,
बस परिश्रम ही फलदायी है ।

gud poem
ReplyDeleteI agreed
ReplyDeleteThank you Gupta ji
DeleteThank you Gupta ji
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